All Award List 2020 In Hindi दोस्तों हम आपको बता दे भारत में अनेक प्रकार के पुरस्कार और सम्मान दिए जाते है। जो अलग-अलग भिन्न कारणों व परिस्थितियों के अनुसार दिए जाते हैं।जैसे की भारत रत्न,परमवीर चक्र ,अशोक चक्र ,पद्म विभूषण इत्यादि। आइये हम आपको बताते है कौन – कौन से पुरस्कार कब – कब दिए जाये है।

नागरिक पुरस्कार  1.भारत रत्न  भारत रत्न का पुरस्कार  26 जनवरी 1954  से शुरू हुआ और भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है। सबसे पहला पुरस्कार प्रसिद्ध वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन को दिया गया था। तब से अनेक विशिष्ट जनों को अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्टता पाने के पर यह पुरस्कार दिया जाता है।
पद्म पुरस्कार  1.पद्म विभूषणपद्म विभूषण सम्मान की स्थापना 2 जनवरी 1954 में की गयी थी।भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला यह दूसरा सबसे उच्च नागरिक सम्मान है, जो देश के लिये असैनिक क्षेत्रों में बहुमूल्य योगदान के लिये दिया जाता है। इस पुरस्कार में सोने, चांदी या फिर कांस्य पदक दिए जाते हैं,और यह सम्मान भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है।
2.पद्म भूषणपद्म भूषण सम्मान की स्थापना 2 जनवरी 1954 में की गयी थी।भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला यह तीसरा सबसे उच्च नागरिक सम्मान है, जो देश के लिये असैनिक क्षेत्रों में बहुमूल्य योगदान के लिये दिया जाता है। इस पुरस्कार में सोने, चांदी या फिर कांस्य पदक दिए जाते हैं,और यह सम्मान भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है।
3.पद्म श्रीपद्म श्री भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला यह चौथा सबसे उच्च नागरिक सम्मान है, जो देश के लिये असैनिक क्षेत्रों में बहुमूल्य योगदान के लिये दिया जाता है। और यह सम्मान भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है।
सैन्य पुरस्कार  1.परमवीर चक्रयह पदक शत्रु के सामने अत्याधिक साहस तथा परम शूरता का परिचय देने पर दिया जाता है। युद्ध के मैदान में अप्रतिम सैन्य प्रदर्शन के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार 26 जनवरी 1950 से शुरू किया गया और यह पदक मरणोपरांत भी दिया जाता है। शाब्दिक तौर पर परम वीर चक्र का अर्थ है “वीरता का चक्र”। 
2.महावीर चक्रमहावीर चक्र युद्ध के समय वीरता का पदक है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार मरणोपरांत  भी दिया जा सकता है।पहली बार 1947 दिया गय।
3.वीर चक्र  यह पदक युद्ध में शत्रु के सामने अद्वितीय साहस तथा परम शूरता का परिचय देने पर दिया जाता है। 26 जनवरी 1950 से शुरू किया गया यह पदक मरणोपरांत भी दिया जाता है। शाब्दिक तौर पर परम वीर चक्र का अर्थ है “वीरता का चक्र”
 
शांति के दौरान के पुरस्कार  1.अशोक चक्र अशोक चक्र शांति काल में दिया जाने वाला वीरता पुरस्‍कार है।यह सबसे ऊँचा वीरता पदक है ,यह युद्ध के अतिरिक्‍त शौर्य, बहादुरी और बलिदान के लिए दिया जाता है। इसे हरे रंग के रिबन के साथ पहनाया जाता है, जिसमें एक केसरिया रंग की पट्टी बनी होती है। 
2.कीर्ति चक्र  कीर्ति चक्र वरियता मे यह ‘महावीर चक्र’ के बाद आता है। इस सम्‍मान की स्‍थापना 4 जनवरी 1952 को हुई थी। 198 बहादुरों को यह पुरस्‍कार मरणोपरांत दिया गया है। पुरस्‍कार सेना, वायुसेना और नौसेना के ऑफिसर्स और जवानें के अलावा, टेरिटोरियल आर्मी और आम नागरिकों को भी दिया जाता है।
3.शौर्य चक्र  वरियता में यह कीर्ति चक्र के बाद आता है।शौर्य चक्र वीरता का पदक है। यह सम्मान सैनिकों और असैनिकों को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान के लिए दिया जाता है। यह मरणोपरान्त भी दिया जा सकता है।
युद्ध/शांति के दौरान सेवा और पराक्रम के पुरस्कार  1.सेना मैडल  “सेना मैडल ऐसी असाधारण कर्तव्य निष्ठा या साहस का परिचय देने वाले विशिष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया जाता है जो कि सेना के लिए विशेष महत्व रखते हों। 
2.नौ सेना पदक  नौ सेना पदक के लिए युद्ध अथवा शांति काल में विशेष महत्व के असाधारण व्यक्तिगत कार्यों के लिए दिया जाता है।
3.वायु सेना पदक  वायु सेना पदक की स्थापना 17 जून 1960 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा की थी और 1961 से सम्मान दिए जाने लगे। पिछले एक दशक में ये सम्मान दो  विभागों में ,वीरता और समर्पण के लिए दिया जाता रहा हैं।यह सम्मान मरणोपरांत भी दिया जाता है।
युद्ध के दौरान विशिष्ठ सेवा  1.सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक    इस पदक की शुरूआत 26 जून 1980 को की गई, यह पदक युद्ध/मुठभेड़/प्रतिकूल परिस्थितियों में असाधारण कोटि की विद्गिाषट सेवा को सम्मानित करने के लिए प्रदान किया जाता है।  
2.उत्तम युद्ध सेवा पदक  उत्तम युद्ध सेवा पदक युद्धकालीन उल्लेखनीय सेवा के लिए भारत सरकार द्वारा प्रदत्त सैन्य सम्मान में से एक है। इसे परिचालन संबंधी उच्च स्तर की विशिष्ट सेवाओं के लिए दिया जाता है। 
3.युद्ध सेवा पदक  इस पदक की शुरूआत 26 जून 1980 को की गई, यह पदक युद्ध/मुठभेड़/प्रतिकूल परिस्थितियों में असाधारण कोटि की विद्गिाषट सेवा को सम्मानित करने के लिए प्रदान किया जाता है।
शांति के दौरान विशिष्ठ सेवा  1.परम विशिष्ट सेवा पदक  परम विशिष्ट सेवा पदक की शुरूआत 26 जनवरी 1960 को वी एस एम श्रेणी-प् के रूप में की गई, यह पदक असाधारण कोटि की विद्गिाषट सेवा को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है। 27 जनवरी 1967 को इसका नाम परम विद्गिाषट सेवा मेडल कर दिया गया।
2.अति विशिष्ट सेवा पदक  अति-विशिष्ट सेवा पदक मूलतः “विशिष्ट सेवा पदक, वर्ग II” के रूप में स्थापित किया गया था। इसे 27 जनवरी, 1 9 67 को यह नाम दिया गया और बैज को दोबारा बदल दिया गया। 1 9 80 से यह पदक मात्र गैर-परिचालन की सेवा के लिए दिया जाता है क्योंकि परिचालन में विशिष्ट सेवाओं को पहचानने के लिए उत्तम युद्ध सेवा मेडल का प्रावधान किया गया था। 
3.विशिष्ट सेवा पदक  विशिष्ट सेवा पदक भारत सरकार द्वारा सशस्त्र बलों के सभी रैंकों के कर्मियों के लिए ,”विशिष्ट आदेश पर की जाने वाली असाधारण सेवा हेतु “, दिया जाने वाला सम्मान है। यह सम्मान मरणोपरांत भी प्रदान किया जा सकता है और एक से अधिक बार सम्मान प्राप्त करने पर रिबन पर एक ‘बार’ द्वारा अंकित किया जाता हैं।
नेतृत्व पुरस्कार  1.गाँधी शांति पुरस्कारभारत सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय गाँधी शांति पुरस्कार भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर दिया जाने वाला वार्षिक पुरस्कार है। गांधी जी के शांति सिद्धांतों को श्रद्धांजलि स्वरूप, भारत सरकार ने यह पुरस्कार 1995 में उनके 125 वें जन्म-दिवस पर आरंभ किया था।
2.इंदिरा गाँधी पुरस्कार  पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की स्मृति में स्थापित इंदिरा गांधी मेमोरिल ट्रस्ट हर साल उनके जन्मदिन के मौके पर शांति, समाज सेवा, निरस्त्रीकरण और विकास के क्षेत्र में काम करने वाले किसी व्यक्ति या संगठन को प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार प्रदान करता है।
साहित्य पुरस्कार  1.ज्ञानपीठ पुरस्कार  ज्ञानपीठ पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है।
2.साहित्य अकादमी पुरस्कार  यह भारत की प्रमुख भाषाओं में साहित्य के मामले में दिया जाने वाला सबसे सम्मानित पुरस्कार है. इसे साल 1954 में स्थापित किया गया था। 1,00,000 रुपये का चेक भी दिया जाता है।
3.भाषा सम्मान पुरस्कार  भाषा सम्मान पुरस्कार एक भारतीय साहित्यिक पुरस्कार जो हर साल प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार के वितरण का प्रारंभ साहित्य अकादमी ने 1996 से किया। साहित्य अकादमी मान्यता-प्राप्त 24 भारतीय भाषाओं में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान करती है। इसलिए भाषा सम्मान पुरस्कार को गैर-मान्यता प्राप्त भाषाओं में साहित्यिक रचनात्मकता के साथ ही शैक्षिक अनुसंधान को स्वीकार और बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया था।
4.अनुवाद पुरस्कार  सर्जनात्मक लेखन के लिए दिए जाने वाले पुरस्कारों के अतिरिक्त अकादेमी सन् 1989 से अनुवादों के लिए पुरस्कार प्रदान कर रही है। यह पुरस्कार अकादेमी की मान्यता प्राप्त 24 भाषाओं में विशिष्ट अनुवादकों को दिए जाते हैं। सन् 1989 में इसकी पुरस्कार राशि 10,000/-रु. थी, सन् 2001 में ब़ढाकर इसे 15,000/-रु. कर दिया गया तथा सन् 2003 से यह राशि 20,000/-रु. कर दी गई तथा सन् 2009 में यह राशि 50,000/- रुपए कर दी गई है। साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार को अधिशासित करने वाले नियम इस प्रकार हैं।
5.अन्नंद कुँवरस्वामी फ़ेलोशिप  आनंद कुमारस्वामी फेलोशिप की शुरुआत वर्ष 1996 में हुई थी। यह एक साहित्यिक परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए एशियाई देशों के विद्वानों को भारत में 3 से 12 महीने बिताने के लिए दिया जाता है।
6.प्रेमचंद्र फ़ेलोशिप  प्रेमचंद फैलोशिप की शुरुआत 2005 में हुई थी और इसे सार्क देशों से संबंधित लोगों को प्रस्तुत किया गया है जिन्होंने संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है उनके सामान में यह फैलोशिप दी जाती है।  
राष्ट्रिय खेल पुरस्कार  1.राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड  राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार खेल के क्षेत्र में दिया जाता है। यह खेल जगत का सबसे बड़ा भारतीय सम्मान है. इस पुरस्कार की शुरुआत 1991–1992 में हुई थी।  इस पुरस्कार के विजेता को 7.5 लाख रुपये पुरस्कार राशि के रूप में दिए जाते है।
2.द्रोणाचार्य अवार्ड  द्रोणाचार्य अवार्ड पुरस्कार, आधिकारिक तौर पर खेल और खेलों में उत्कृष्ट कोचों के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार के रूप में जाना जाता है।
3.अर्जुन अवार्ड  अर्जुन पुरस्कार खिलाड़ियों को दिये जाने वाला एक पुरस्कार है। जो भारत सरकार द्वारा खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के करने पर दिया जाता है।
4.ध्यान चंद अवार्ड  ध्यानचंद अवार्ड भारत के सर्वोत्त्म खेल पुरस्कारों में से एक है। जो किसी खिलाडी के जीवन भर के कार्य को गौरवान्वित करता है। आधिकारिक रूप से इसका नाम खेलों में जीवनगौरव ध्यानचंद पुरस्कार है। इस पुरस्कार का नाम भारत के प्रसिद्ध मैदानी हॉकी के खिलाडी ध्यानचंद सिंह के नाम पर रखा गया है।

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